सार्क देशों का नेतृत्व प्रधानमंत्री मोदी का बेहतर कदम

Prime Minister Modi's Better Move To Lead SAARC ountries (Pic: asianetnews)

कोरोना वायरस से पूरी दुनिया परेशान है किंतु सौभाग्य से भारत की बड़ी आबादी को देखते हुए यह बीमारी फिलहाल नियंत्रण में है। इसके लिए तमाम दूसरे कारण भी हो सकते हैं लेकिन केंद्र सरकार की सजगता को इसका श्रेय अवश्य मिलना चाहिए। केंद्र सरकार की सजगता ना केवल अपने देश में इस बीमारी को फैलने से रोकने में कारगर साबित हुई है बल्कि अपने पड़ोसी देशों बांग्लादेश, अफगानिस्तान, श्रीलंका, भूटान, पाकिस्तान और नेपाल का भी नेतृत्व करते दिखी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की करोना मुद्दे पर सार्क देशों का नेतृत्व करने की सोच का सार्क देश के सभी सदस्यों ने सराहना की है।


सार्क देशों के साथ इस मुद्दे पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करने से पहले भारत ने चीन के वुहान से अपने नागरिकों को रेस्क्यू करने के साथ-साथ वुहान में पढ़ाई कर रहे बांग्लादेशी छात्रों का भी रेस्क्यू किया। जिसके लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना ने जिक्र करते हुए भारतीय प्रधानमंत्री का धन्यवाद किया। वीडियो कांफ्रेंसिंग के बाद जो बातें सामने आई है उसके अनुसार तमाम सार्क देशों के राष्ट्राध्यक्ष इस मामले पर सजग हुए हैं और अपने देश में इस मुद्दे को प्रायरिटी देने पर सहमत हुए हैं। 

यह एक बेहद महत्वपूर्ण कदम है क्योंकि तमाम देशों की सीमाएं एक दूसरे से सटी है। भारत सरकार की इस बात के लिए भी सराहना करनी होगी कि प्रधानमंत्री मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में 10 बिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता करने की घोषणा की। इसके अलावा कोरोना से निपटने के लिए डॉक्टरों की रैपिड रिस्पांस टीम गठित करने की भी घोषणा की जिसमें मौजूद तमाम डॉक्टरों के पास इमरजेंसी किट और दूसरे जरूरी उपकरण शामिल रहेंगे। पीएम ने साफ तौर पर कहा कि यह रैपिड रिस्पांस टीम सार्क देशों की सहायता के लिए हमेशा तैयार रहेगी और इस तरीके से दूसरी जरूरी ट्रेनिंग पर और सॉफ्टवेयर के जरिए कोरोना को हराया जा सकता है।
Prime Minister Modi's Better Move To Lead SAARC ountries (Pic: fda)

भारत की इस मामले में भी तारीफ करनी होगी कि अपने एहतियाती कदमों में उसने ना केवल एयरपोर्ट बल्कि देश के 12 प्रमुख बंदरगाहों पर 700 से अधिक जहाजों में  मौजूद 25,000 से अधिक यात्रियों को उतरने ही नहीं दिया गया। बताया जाता है कि यह तमाम जहाज चीन या दूसरे को रोना अफेक्टेड एरिया से होकर लौटे थे। बंदरगाहों पर n95 मास्क और थर्मल स्कैनर की भी व्यवस्था करने की बात कही गई और इस तरीके से भारत ने समय रहते प्रभावी कदम उठाया।


हालांकि इस बीच हमें सावधान रहने की जरूरत है क्योंकि भारत में एक बड़ी आबादी रहती है और तमाम एक्सपर्ट इस बात की आशंका जता रहे हैं कि भारत को अपनी सुविधाओं का स्तर और बढ़ाना होगा, तो जागरूकता पर हमें कहीं ज्यादा कार्य करने की जरूरत है। चुकी डब्ल्यूएचओ द्वारा यह पहले ही महामारी घोषित हो चुकी है इसीलिए अपनी तैयारियों को लेकर हमें किसी भी मुगालते में नहीं रहना चाहिए। कोरोना चेकअप को लेकर भारत सरकार को ज्यादा प्रयास किए जाने की आवश्यकता है और अब तक के प्रयास निश्चित रूप से संतोषजनक है खासकर सार्क देशों के साथ प्रभावी समन्वय इस मामले में बड़े स्तर की जागरूकता फैला सकता है।


एक बात यह भी सच है कि इस मामले में सिर्फ सरकारें ही जागरूकता नहीं फैला सकती हैं बल्कि आम जनमानस को भी सजग रहना पड़ेगा। सबसे बड़ी बात है कि हम सबके पास इससे बचाव के उपाय आ चुके हैं बस उन्हें गंभीरता से लेने की जरूरत है। जैसे हाथ मिलाने से बचना, हाथ को बार-बार साबुन से धोना, अपने आसपास सफाई रखना, जुकाम, खांसी, बुखार और सांस लेने में जरा भी दिक्कत हो तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करके दवा लेना, परिवार में जो बुजुर्ग सदस्य हैं उनकी इम्यूनिटी को बढ़ाने हेतु प्रयास करना, अगर कोई परिवार का मेंबर या पड़ोसी विदेश से आया है तो उस पर विशेष ध्यान रखना। 
Prime Minister Modi's Better Move To Lead SAARC ountries (Pic: thedollarbusiness)

और सबसे बड़ी बात यह कि अफवाहों से सावधान रहना जरूरी है, क्योंकि इससे पैनिक होने से समस्या बढ़ती है। इसके अतिरिक्त भी कई स्तर की एडवाइजरी जारी की गई है जिसमें पर्यटन स्थलों से दूर रहना, भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों या कॉन्फ्रेंस में जाने से दूर रहना। कच्चे या अधपके मांस और अंडों के सेवन से बचना इत्यादि शामिल है।

उम्मीद की जानी चाहिए कि केंद्र सरकार के प्रयासों के साथ अगर जनता जागरूक हो तो इस महामारी का इलाज ढूंढे जाने तक बचाव किया जा सकता है। हाल फिलहाल यही एक रास्ता है जिसे हम सब को स्वीकार करना चाहिए।

-विंध्यवासिनी सिंह 

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