google.com, pub-7859222831411323, DIRECT, f08c47fec0942fa0 बजने वाली है दिल्ली चुनाव की 'डुगडुगी'

बजने वाली है दिल्ली चुनाव की 'डुगडुगी'

नेशनल कैपिटल दिल्ली तमाम वजहों से आये दिन चर्चा में बनी रहती है। पिछले दिनों प्रदूषण को लेकर इसकी चर्चा न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने लगी थी तो हाल में या होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर चर्चा गर्म होने लगी है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपनी लोकलुभावन योजनाओं और बिजली पानी पर लगभग 100 फ़ीसदी सब्सिडी को लेकर कॉन्फिडेंट नजर आ रहे हैं। 

कांफिडेंस का लेवल इतना हाई है कि वो चुनाव के लिए नारा दे रहे हैं 'अब की बार 67 पार'। बताते चलें कि पिछले विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल की पार्टी 'आम आदमी पार्टी' ने  67 सीटों पर जीत हासिल की थी जबकि विपक्षी भारतीय जनता पार्टी मात्र 3 सीटों पर सिमट गई। अरविंद केजरीवाल का कॉन्फिडेंस यही नहीं रुक रहा है बल्कि वह भारतीय जनता पार्टी के संबंध में मजाक उड़ाते हुए कह रहे हैं कि अबकी बार उसका नारा होगा '3 सीट पार'
Delhi chief minister Arvind Kejriwal, deputy CM Manish Sisodia (Pic: theprint)


मगर यह राजनीति है यहाँ कब बाजी पलट जाए यह कहा नहीं जा सकता है। केंद्र और एक के बाद दूसरे राज्यों में जीत हासिल करती जा रही भाजपा को ही ले लीजिये। भाजपा नेता तो अगले 50 सालों तक उसके सत्ता में बने रहने की भविष्यवाणी तक कर रहे थे। लेकिन जिस प्रकार एक के बाद दूसरे राज्य उनके हाथों से फिसल ते जा रहे हैं उससे उनका कॉन्फिडेंस भी डगमगा गया है। 

निश्चित रूप से दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के भीतर उस तरह का कॉन्फिडेंस नजर नहीं आ रहा है जिस तरह कांफिडेंस उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दिखलाया करते हैं।

अन्य राज्यों सहित दिल्ली की बात की जाए तो जिस प्रकार से अरविंद केजरीवाल ने 5 साल तक स्थिर सरकार दी  है और शिक्षा और स्वास्थ्य में फ्रंटफुट पर प्रचार कर रही है उसने निश्चित रूप से उसकी उम्मीदों को हवा दी है। काउंटर में भारतीय जनता पार्टी ने भी दिल्ली की अनाधिकृत कालोनियों को मालिकाना हक दे कर वापसी की कोशिश की है किंतु बावजूद इसके दिल्ली के नेताओं और कार्यकर्ताओं में जोश की कमी देखी जा रही है। दिल्ली भाजपा के नेता और कार्यकर्ता इस बात की उम्मीद लगाए बैठे हैं कि केंद्रीय स्तर पर कुछ चमत्कार किया जाएगा। उधर आम आदमी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता इस बात को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं बीजेपी का नेतृत्व दिल्ली में कोई चमत्कार नहीं कर पाएगा।


हालाँकि की बात वही है कि राजनीति में कब क्या उल्टा हो जाए उसका आकलन करना आसान नहीं है। बेशक अरविंद केजरीवाल आज हवाई घोड़े पर सवार हैं और उनको ऐसा लग रहा है कि मतदाता उन्हीं के पक्ष में इलेक्शन बटन दब आएंगे। लेकिन मतदाताओं के मूड को तो कितना भी बड़ा राजनेता हो पूरी तरह से भांपने में असफल ही रहा है। ऐसे ऐसे लोगों की सत्ता से हाथ से निकली है जिन्हें कभीअजेय  माना जाता था। वैसे भी आम आदमी पार्टी की फ्री बिजली, फ्री पानी योजना से कुछ लोग बेशक खुश हो लेकिन एक बड़ा वर्ग इस मुफ्त खोरी के खिलाफ भी है। 

कई लोग मानते हैं कि इस मुफ्त खोरी की बजाय दिल्ली के इंफ्रास्ट्रक्चर को और ज्यादा डेवलप करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। कई लोग यह उदाहरण देने से नहीं चूकते हैं कि शीला दीक्षित के जमाने में दिल्ली में जितने फ्लाईओवर्स बने जितना इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवेलप हुआ उसके बाद उस काम में जरा भी बढ़ोतरी नहीं हुई। वहीं केजरीवाल को पानी मुफ्त देने की बजाय साफ पानी के विकल्प की तरफ ज्यादा ध्यान दिया जाना चाहिए। 

दिल्ली में सभी जगहों की सड़कों पर एंक्रोचमेंट है जिस पर दिल्ली सरकार के अधिकार में आने वाली सड़कों पर जरा भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। व्यापारियों को टैक्सेशन के नाम पर परेशान करने की बातें भी सामने आ रही हैं लेकिन उनकी सुविधाओं में बढ़ोतरी पर कोई बात नहीं करना चाहता।

क्या वाकई इसी नजरिए से दिल्ली का विकास संभव है? यह अरविंद केजरीवाल को सोचना चाहिए। वहीं भारतीय जनता पार्टी को विचार करना चाहिए कि क्यों उसका कॉन्फिडेंस कम है और क्यों तमाम राज्यों की तरह वह इस बार दावा नहीं कर पा रही है कि अबकी बार 50 पार या 60 पार। कांग्रेश पार्टी जो कभी दिल्ली में एक छत्र शासन करती थी उसकी बात इस चुनाव में क्यों नहीं हो रही है? क्यों उसे एक सीरियस दावेदार के रूप में नहीं लिया जा रहा है? यह विचार करना भी बेहद महत्वपूर्ण है। 

बहरहाल चुनाव ही वह पैमाना होता है जो किसी भी पार्टी की लोकप्रियता और अलोकप्रियता का साक्षी होता है। दिल्ली में भी जल्द ही 2020 के विधानसभा चुनाव में पता चल जाने वाला है कि कौन दिवास्वप्न देख रहा है और कौन उम्मीदों के वास्तविक घोड़े पर चल रहा है? दिल्ली की जनता बदलाव चाहती है या अगले 5 साल केजरीवाल को ही मिलेंगे ये आने वाला चुनाव ही बताएगा।

- विंध्यवासिनी सिंह 

Web Title: Delhi Election 2020 Article In Hindi

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