google.com, pub-7859222831411323, DIRECT, f08c47fec0942fa0 दान देने की प्रवृत्ति उत्तम है मगर...

दान देने की प्रवृत्ति उत्तम है मगर...

Pic: uttarakhandmirror
भारत को सदा से ही दानियों का देश माना जाता रहा है। हमारी पौराणिक कथाओं में दानवीर 'कर्ण'जैसे महारथी हुए हैं जिन्होंने क्या कुछ नहीं दान किया। उन्होंने तो अपनी जान की परवाह ना करते हुए अपने उस कवच और कुंडल को भी दान कर दिया जिससे उनकी सुरक्षा सुनिश्चित होती। सिर्फ दानवीर कर्ण ही क्यों देश में तमाम महारथी हुए हैं जो दान देकर अपने कर्तव्य का पालन सुनिश्चित करते रहे हैं। 

इसमें चाहे आप उन भामाशाह का नाम ले लीजिए जिन्होंने महाराणा प्रताप की तब सहायता की थी जब उनके पास से सब कुछ छीन गया था। उन्हीं भामाशाह की मदद से महाराणा प्रताप ने पुनः अपनी सेना खड़ी की और मुगल सम्राट अकबर से अपना राज्य वापस लिया। ऐसे और भी अनगिनत उदाहरण आपको मिल जाएंगे मंदिर और धर्मशाला का निर्माण समाज हित की दृष्टि से ही नामी-गिरामी व्यापारियों द्वारा किया जाता रहा है। ऐसे में अगर हमारे देश में आज भी विश्व में अगर सबसे अधिक गरीब हैं तो यह अपने आप में आश्चर्य का विषय है।

हालांकि भारत में दान वीरों की कमी नहीं है और गवर्नमेंट द्वारा 'सीएसआर' (CSR) 'कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी' के तहत समाज सेवा अनिवार्य करने के बाद यह चलन बढ़ा है। इस नियम के अनुसार सभी कंपनियों द्वारा पहले से तय लिमिट से ज्यादा नेटवर्थ  आने पर प्रॉफिट का 2  पर्सेंट हिस्सा कॉर्पोरेट सोशल रेस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तौर पर खर्च करना होता है।

अगर हम मौजूदा समय में देश के सबसे अमीर लोगों क दान पर नजर डालेंगे तो टेक्नॉलजी कंपनी HCL के चीफ 'शिव नाडर' देश के सबसे बड़े दानी बिजनेसमैन हैं। नाडर की तरफ से  826 करोड़ रुपये दान किए हैं। वहीं देश के सबसे बड़े अमीर रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी द्वारा 402 करोड़ रूपये दान किये गए। अम्बानी भारत के दानी अमीरों की लिस्ट में तीसरे स्थान पर आते हैं। 

जबकि 'विप्रो' के चीफ 'प्रेमजी अज़ीम' 453 करोड़ का दान करके इस लिस्ट में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। ये तो हैं बड़े नाम लेकिन देश में देश में उन दानियों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है जो 5 करोड़ या उससे ज्यादा का दान कर रहे हैं। 2019 की ही बात करें तो इन छोटे दानियों द्वारा  4,391 करोड़ रुपये दान किये गए। हालाँकि इसमें आधी रकम सीएसआर दौराही आया है।

वहीं सीएसआर का क्रियान्वयन कितना होता है इसमें काफी किंतु परंतु होता है। कहा तो यहां तक जाता है कि कंपनियां उन्हीं संस्थाओं को दान देती हैं जो पिछले दरवाजे से उनके हित के लिए कार्य करती हैं बजाय कि समाज हित के कार्य करने के। हालाँकि दान के बारे में हमारे शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि अगर आप बाएं हाथ से दान देते हैं तो दाएं हाथ को पता नहीं चलना चाहिए। ऐसी स्थिति में सीएसआर कितना इफेक्टिव हो रहा है यह अपने आप में जांच का विषय है।
Pic: moneycontrol

अमेरिका इत्यादि देशों को देखें तो विश्व के सबसे धनी का खिताब दशकों तक अपने सिर पर सजाएं रहे 'बिल गेट्स' दुनिया भर में बड़े परोपकारी के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने 'माइक्रोसॉफ्ट' से रिटायरमेंट लेने के पश्चात एक तरह से अपना जीवन इसी कार्य के लिए समर्पित कर दिया है। निश्चित रूप से उनसे भारतीय कारोबारियों को सीख लेनी चाहिए। भारतीय कारोबारियों द्वारा विभिन्न सेक्टर्स को चुनकर उस पर गहनता से कार्य किए जाने की आवश्यकता है। 

यह समाज में बढ़ रही अमीरी गरीबी की खाई को कम करने में मददगार साबित हो सकता है तो व्यक्तियों की मूलभूत जरूरतों के प्रति भी संजीदगी बढ़ाने में मदद कर सकता है। व्यापारी चाहे छोटा हो या बड़ा हो लेकिन दान देने की प्रवृत्ति उसमें अवश्य ही होनी चाहिए। इतना ही नहीं  यही एक रास्ता भी है कि आने वाली पीढ़ी भी कुछ देने के बारे में विचार करेगी और जब तक देने का भाव नहीं होगा तब तक समाज का कल्याण सुनिश्चित नहीं होगा।
-विंध्यवासिनी सिंह 

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