google.com, pub-7859222831411323, DIRECT, f08c47fec0942fa0 समूचे विश्व के लिए शर्मनाक है 'ग्लोबल हंगर इंडेक्स' 2019

समूचे विश्व के लिए शर्मनाक है 'ग्लोबल हंगर इंडेक्स' 2019

Pic: insightsonindia
आप दुनियाभर के तमाम लोगों के भाषण सुन लीजिए, तमाम बड़े नेताओं के भाषण सुन लीजिए जिसमें दुनिया को मिटाने से लेकर एक दूसरे की अर्थव्यवस्था को तबाह करने की धमकी देने मिलेगी। इतना ही नहीं किसी दूसरे देश के आंतरिक मामलों में टांग अड़ाने से लेकर चांद और मंगल पर जाने की बातें आपके कान को सूजा देंगे। आप इस खुशफहमी का शिकार हो जाएंगे कि आप एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जहां किसी प्रकार का कोई दुखी नहीं है। आज के इस दौर में इंसान लगातार तरक्की के बारे में सोचता जा रहा है लेकिन हकीकत क्या है?

इस हकीकत को हर साल किसी रिपोर्ट के माध्यम से हम और आप देखते हैं, दुनियाभर के तमाम नेता देखते हैं किंतु इस हकीकत को बदलने का प्रयास कभी नहीं होता है। यह हकीकत है दुनियाभर के करोड़ों लोगों की ऐसी स्थिति जिन्हें भरपेट भोजन तक नसीब नहीं होता है। जरा गौर कीजिए हम किस दुनिया में रह रहे हैं और हमारी वास्तविकता क्या है?  ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2019 की यह रिपोर्ट हमारे सामने स्याह तस्वीर की भांति मुंह फैलाए खड़ी है। इस रिपोर्ट में दुनिया भर के 117 देशों की लिस्ट जारी करके यह बताया गया है कि रोज तरक्की कर रही और आधुनिक हो रही दुनिया में किस देश में कितने लोग भूखे रहते हैं। यह 'ग्लोबल हंगर' रिपोर्ट हर साल अक्टूबर के महीने में जारी की जाती है। 

इस साल के इस रिपोर्ट में भारत के लिए चिंता बढ़ने वाले आंकड़े सामने आये हैं। 119  देशों की रैंकिंग में भारत 103वें स्थान पर पहुँच गया है। रिपोर्ट में यह बात भी सामने आयी है कि 2014 के बाद से भारत के हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है बल्कि स्थिति और अधिक बिगड़ी ही है। बता दें कि ग्लोबल हंगर रिपोर्ट कुपोषण, बाल मृत्युदर, उम्र के अनुपात में कम विकास, लंबाई के अनुपात में कम वजन जैसे चार पैमानों पर मापे जाते हैं। इस पैमाने को आधार बना कर भारत को 30।3 अंक मिला है जो यह बताता है कि भारत में भूखे रहने वालों की स्थिति बहुत ही ख़राब है। 
Pic: satyahindi

अगर भारत में योजनाओं की बात करें तो मिड डे, अंत्योदय अन्न योजना, अन्नपूर्णा, राशन वितरण प्रणाली जैसी कई सारी जोजनए चलायी गयी हैं ताकि कोई भूखा नहीं रहे मगर  भोजन के अधिकार को सुनिश्चित करने वाली ये सरकारी योजनाएं कितनी सफल हैं इसका खुलासा आप हंगर रिपोर्ट में देख सकते हैं। इतना ही नहीं 2013 में खाद्य सुरक्षा अधिनियम भी परित किया गया हैं लेकिन लोगों को कितना फायदा हुआ है यह बताने की जरुरत नहीं है। 

देश में इस सशक्त सरकार है तो इतनी तो लोगों को उम्मीद होनी ही चाहिए कि भर पेट भोजन सबको उपलब्ध हो सके। ऐसे में यह उम्मीद और अधिक बढ़ जाती है जब हमारे देश के प्रधानमंत्री पकिस्तान के लोगों को बेरोज़गारी, कुपोषण, भूख और ग़रीबी से जंग लड़ने की नसीहत देते हैं। भारत के संदर्भ में तो यह रिपोर्ट और भी शर्मनाक है क्योंकि देशभक्ति के बड़े-बड़े दावे करने वाली राष्ट्रवाद की नई परिभाषा गढ़ने वाली सरकार है। समस्त हिंदू और भारतीयों के कल्याण का दम भरने वाली सरकार वास्तव में भूखे और कुपोषित लोगों के लिए बच्चों के लिए क्या कर पाई है इसका कोई भी आंकड़ा आपको संतोष नहीं दे पाएगा।

क्या वास्तव में हम वही भारत हैं जो विश्व गुरु होने का दम भरते रहते हैं? क्या वाकई हम वही भारत हैं जो पाकिस्तान को मिटाने की धमकी देते रहते हैं? क्या वाकई हम वही भारत है जिसकी सुप्रीम कोर्ट मंदिर- मस्जिद के बीच विवाद का दशकों से सुनवाई कर रही है। लेकिन इस भूख की रिपोर्ट पर ना उसके पास कोई 'पीआईएल' जाती है और ना ही सुप्रीम कोर्ट के जज स्वता संज्ञान लेते हैं कि आखिर करोड़ों लोग किस प्रकार भूख से पीड़ित हैं। विश्व की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत क्या अपने नागरिकों को भोजन देने में भी असमर्थ है?
Pic: boomlive

इस स्थिति में बदलाव होना चाहिए और यह बदलाव तभी होगा जब भारत समेत समुचित विश्व के नीति निर्धारक अपनी नीतियों और उससे बढ़कर अपनी नियति में परिवर्तन लाएंगे। इस हंगर रिपोर्ट में टॉप स्थान पाने वाले देशों बेलारूस, यूक्रेन, तुर्की, क्यूबा और कुवैत से भारत और विश्व को सीख लेने की जरुरत है। यह जानने की जरुरत है कि ये देश अपने यहाँ से भुखमरी को ख़त्म करने के लिए क्या उपाय अपना रहे हैं। 'स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स चिल्ड्रन' की रिपोर्ट की मानें तो दुनिया भर में 5 साल से कम उम्र के लगभग  70 करोड़ ऐसे बच्चे हैं जो या तो कुपोषित हैं या मोटापे से जूझ रहे हैं। ऐसे में आगे चल कर इन बच्चों को आजीवन बीमार रहने के चांसेस बढ़ जाते हैं। अब वक्त आ गया है कि सारा विश्व एक जुट होकर एक ऐसा कदम उठायें जिससे धरती पर मौजूद हर जीव को भोजन मिल सके।

-विंध्यवासिनी सिंह 

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