google.com, pub-7859222831411323, DIRECT, f08c47fec0942fa0 क्यों बढ़ रही हैं सड़क दुर्घटनाएं

क्यों बढ़ रही हैं सड़क दुर्घटनाएं



यूँ तो हमारे देश में रोड एक्सीडेंट की खबरे भारी मात्रा में रोज ही सुनने को मिलती हैं लेकिन अभी कुछ दिनों पहले ही सिंगर शिवानी भाटिया के रोड एक्सीडेंट में मारे जाने की खबर ने सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्यों आज की युवा पीढ़ी आये दिन होने वाली घटनाओं से सबक नहीं ले रही है। यूँ तो नित्य नए विकसित हो रहे संसाधनों ने हमें सुविधाओं के नए आयाम तक पहुँचाया है मगर थोड़ी सी लापरवाही की वजह से ये संसाधन हमारे जान के दुश्मन भी बन जाते हैं। अगर हम सिर्फ वाहनों की बात करें तो आज के समय में हमारे देश में ऐसी गाड़ियां मौजूद है जो पलक झपकते ही 300 किलोमीटर प्रतिघंटा से भी तेज रफ्तार की स्पीड पकड़ सकती हैं। एक तरह से यह अच्छी बात है मगर क्या हमारे पास उस तरह की तैयारी है जो इन हाई स्पीड गाड़ियों को चलाने के लिए जरुरी है। हाई स्पीड की बात दूर की है हमारे पास तो नार्मल स्पीड की गाड़ी चलाने की भी तैयारी नहीं है।
एक रिपोर्ट की मानें तो भारत में 75 प्रतिशत लोगों को बिना किसी परीक्षा को पास किये ही ड्राइविंग लाइसेंस मिल जाता है। अब जहाँ इस तरह की व्यवस्था हो वहां हादसे तो होंगे ही। इसके साथ ही कुछ और भी अहम् कारण है बढ़ते रोड एक्सीडेंट के जिन पर विचार करना आवश्यक है। 

नेशनल हाईवे और एक्सप्रेस वे पर ज्यादा हो रही हैं दुर्घटनाएं-
जैसा कि हम सबने सुना शिवानी का एक्सीडेंट यमुना एक्सप्रेसवे पर हुआ था। शिवानी ही क्यों इससे पहले  दिल्ली-पानीपत हाईवे पर देश ने पिछले साल  5 पावर लिफ्टिंग खिलाड़ियों को खोया था। अगर आप आंकड़ों पर नजर डालें तो देश भर में फैले सड़क नेटवर्क में हाईवे सिर्फ 2 प्रतिशत हैं मगर मौत के आंकड़ों पर नजर डालें तो कुल हादसों में मरने वालों में 34 ।5% लोग हाईवे दुर्घटना में अपनी जान गवाएं हैं। इन छोटे रोड नेटवर्क पर इतनी दुर्घटनाएं क्यों होती है इसे समझना इतना मुश्किल नहीं है।
जैसा कि हम सब जानते हैं हाईवे पर रोड काफी अच्छा और स्मूथ रहता है और ज्यादातर लोग यहाँ स्पीड लिमिट को नजरअंदाज कर बेहद हाईस्पीड में गाड़ी चलाते हैं जिसकी न उनके पास ट्रेनिंग है न इजाजत।वहीँ दूसरा सबसे कारण यह है कि इन हाईवे पर लोग एक दूसरे को पीछे छोड़ने की होड़ में कभी -कभी गलत ओवरटेकिंग भी करते हैं जो एक्सीडेंट की वजह बनता है।

ट्रैफिक नियमों की जानकारी बेहद कम होना या उन्हें तोड़ना 
जैसा की ऊपर बताया गया है देश में 75 प्रतिशत लोग बिना ड्राइविंग टेस्ट के ही लाइसेंस प्राप्त कर लेते हैं, ऐसे में इन ड्राइवरों से क्या उम्मीद करनी चाहिए। इसके बाद अक्सर लोग रोड पर ट्रैफिक नियमों को तोड़ने में अपनी बहादुरी भी समझते हैं। जब हम रोड पर निकलते हैं तो सड़क के किनारे लगे उन बोर्ड्स  पर शायद ही ध्यान देते होंगे जो उस रोड से सम्बंधित जानकारी और निर्देश बताते हैं। वहीँ अगर इन बोर्ड्स पर ध्यान जयते भी होगा तो ज्यादातर लोगों को वो निर्देश समझ में नहीं आते होंगे।
इस लिए सरकार को चाहिए की स्कूली लेवल पर ही बच्चों को अच्छे से ट्रैफिक सिग्नल्स और रोड रूल्स के बारे में जानकर देना अनिवार्य करा दे। इसके साथ जो लोग सड़क पर अपनी गाड़ी लेकर उतरते हैं वो ना केवल अपनी जान खतरे में डालते हैं बल्कि दूसरों को नुकशान पहुंचा सकते हैं, इसलिए ड्राविंग लाइसेंस वितरण प्रणाली को बेहद दुरुस्त करने की भी जरुरत है।

इसके अलावा भी लोगों को दुपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनने जैसी जरुरी निर्देश का पालन करना चाहिए।इसके साथ ही गाड़ी चलाते समय नशे में ना होना तथा मोबाइल का प्रयोग नहीं करना जैसे निर्देश का भी  ध्यान रखना चाहिए। लोगों को समझना चाहिए कि सरकार जो भी निर्देश और रूल्स बनाती है वो हमारी सुरक्षा को ध्यान में रख कर बनाया जाता है।इसलिए इन नियमों के पालन में हमारी भलाई है ना कि इन्हे तोड़ने में बहादुरी।

हालाँकि  दुर्घटनाएँ कहीं भी, कभी भी घटित हो सकती हैं मगर ज्यादातर इन दुर्घटनाओं  के पीछे किसी ने किसी की जल्दबाजी या लापरवाही जरूर होती है। जल्दबाजी या रोमांच के चक्कर में अक्सर लोग यातायात के नियमों का उल्लंघन करते हैं और अपनी सहित दूसरों के जान को भी खातर में डाल देते हैं।  इसलिए अगली बार जब आप रोड पर उतरें तो ध्यान रखें अपना और दूसरों का तथा ट्रैफिक नियमों का भी।

-विंध्यवासिनी सिंह 

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