google.com, pub-7859222831411323, DIRECT, f08c47fec0942fa0 पाकिस्तान में हिंदू मंदिर का राष्ट्रीय विरासत घोषित होना सिर्फ दिखावा या कुछ और...

पाकिस्तान में हिंदू मंदिर का राष्ट्रीय विरासत घोषित होना सिर्फ दिखावा या कुछ और...



श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर खोलने के लिए पाकिस्तान ने समूचे विश्व से प्रशंसा बटोरी और जिस प्रकार सिखों के लिए इमरान सरकार ने यह पहल की उसकी जरूर ही तारीफ हुई. हालांकि इमरान सरकार के विदेश मंत्री ने यह कह कर पाकिस्तान सरकार के प्रयास पर पानी फेरने की कोशिश की कि इमरान खान की गुगली में भारत फंस गया और उसे श्री करतारपुर साहिब में अपने मंत्री भेजने पड़े. उनके इस बयान के बाद हड़कंप मच गयी और भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तानी विदेश मंत्री के बयान को पाकिस्तान की असल नियत तक बता दिया. वहीं बाद में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान अपने ही विदेश मंत्री के बयान पर लीपापोती करते हुए दिखे और पाकिस्तान की इस कोशिश को कहीं ना कहीं  शक की नजर से ही देखा गया. और ऐसा हो भी क्यों नहीं क्योंकि शुरू से आतंकवाद पाकिस्तान का मुख्य एजेंडा रहा है. अभी यह मसला शांत ही हुआ था कि  इधर बीच में भारतीय फिल्म अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने भारत में असहिष्णुता का मुद्दा उठा दिया. बस फिर क्या था भारत की राजनीति में गहरी रूचि रखने वाले इमरान खान भला कैसे पीछे रहते  उन्होंने मौके को लपकते हुए और अपने बड़बोलेपन का प्रदर्शन करते हुए कहा कि वह भारत को दिखलाएंगे की अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है. यह कितना हास्यास्पद बयान था इसका अंदाजा शायद इमरान खान को खुद भी नहीं होगा. हालाँकि इमरान खान को जवाब कई लोगों सहित क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने दिया और कहा कि जब दोनों देश अलग हुए थे तब पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यकों की संख्या 18 प्रतिशत थी लेकिन मौजूदा समय में पाकिस्तान में यह आंकड़ा केवल 2% बची हुई है. इसके उलट भारत में अल्पसंख्यकों की संख्या लगातार बढ़ी है, इसलिए पाकिस्तान इस मामले में शेखी बघारने की कोशिश ना करें. 

हालांकि जब देश की बात आती है तो निसंदेह दोनों तरफ से बयानबाजी होती है लेकिन इन सब घटनाक्रमों के बीच पाकिस्तान ने एक बेहद पुराने हिंदू मंदिर को राष्ट्रीय विरासत घोषित करने की कवायद की है. आपको बता दें कि पाकिस्तान के पख्तूनख्वा राज्य के   पेशावर में स्थित एक बेहद प्राचीन हिंदू धार्मिक जगह 'पंज तीरथ' है जिसका सम्बन्ध महाभारत काल से है. पांच पवित्र तालाबों की वजह से इस स्थान का नाम 'पंज तीरथ' पड़ा. वहीं प्रचीन समय से ही हिन्दू इस स्थान पर कार्तिक महीने में आते हैं तालाबों में नहाते हैं और यहाँ स्थित मंदिर और खजूरों के पेड़ों के नीचे रहकर दो दिन तक पूजा -अर्चना करते हैं. वहीं करतारपुर साहिब की पहल के बाद इमरान खान ने केपी ऐन्टिक्वीटीज एक्ट 2016 के तहत पंज तीरथ पार्क की भूमि को राष्ट्रिय विरासत स्थल घोषित किया है और इसको नुकशान पहुँचाने वालों के लिए 20 लाख रुपये का जुर्माना और पांच साल तक की सजा की घोषणा की है. पाकिस्तान में चल रहे जंगल राज में इस तरह के नियम-कानून से अल्पसंख्यकों को विशेष लाभ तो नहीं होने वाला लेकिन इतना जरूर है कि एक आशा किरण जरूर दिखाई देगा और विलुप्तप्राय हो चुके हिन्दू अल्पसंख्यकों को अपने वजूद का एहसास होगा.

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सबसे बड़ी बात तो यह है कि यह पहल पाकिस्तान के लिए ज्यादा फायदेमंद है क्योंकि आज से लगभग 74 साल पहले  भारत और पाकिस्तान का बंटवारा धर्म के आधार पर ही हुआ था. उसके बाद तो पाकिस्तान में इस्लाम को छोड़कर बाकी सारे धर्मों की निशानियां मिटाने की पुरजोर कोशिशें हुई. पाकिस्तान में हिंदू मंदिरों को तहस-नहस किया गया और अंततः पाकिस्तान गर्त में डूबता चला गया. जहां इंडिया एक ओर चांद पर पहुंच गया मंगल पर चला गया वहीं पाकिस्तान आतंक और आतंकवादियों की ओट में छिपा रहा. सच कहा जाए तो जब आप अपने से विरोधी विचारधारा का सम्मान करते हैं तो आप अपना ही भला करते हैं. पाकिस्तान अगर सच में इमरान खान के नेतृत्व में माइनॉरिटी कम्युनिटी क्या विकास करता है उत्थान करता है तो इसे भारत को या दूसरे देशों को सीख मिले ना मिले लेकिन खुद पाकिस्तान को इस से बहुत फायदा पहुंचने वाला है. आखिर ईशनिंदा कानून में फंसी आसिया बीबी को कौन नहीं जानता है किस प्रकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी पाकिस्तान की जनता मॉब लिंचिंग करने पर आमादा है आसिया को लेकर  वहां की जनता जानवर बनती जा रही है. आसिया के मामले में विश्वभर से आवाजें उठीं कि केवल किसी के धर्म के बारे में बोलने से उसे फांसी कैसे दी जा सकती है लेकिन पाकिस्तान अपने कट्टर रवैया पर अभी भी अड़ा हुआ है. 

अगर आप सिर्फ अपनी ही विचारधारा अपने ही विचार को प्राथमिकता देंगे तो आप निश्चित रूप से जंगल के कानून को ही मान रहे हैं इसलिए बेहतर हो कि तमाम धर्मों में छिपे संदेश को समझते हुए पाकिस्तानी सरकार और उसके बाद वहां की आवाम को माइनॉरिटी की कद्र करने की जरूरत है दुनिया में कुछ भी मुश्किल नहीं है और बहुत सारे छोटे देश बहुत आगे निकले हैं तो पाकिस्तान भी ऐसा कर सकता है. हालांकि पाकिस्तान के एक प्रयास से अगर कोई ऐसा समझता है कि वह सुधर जाएगा तो यह बचकाना ही होगा उसे कई दशक लगेंगे और उसे अपने प्रयास जारी रखने होंगे तभी वह अपनी छवि सुधार पाएगा. अगर ऐसा हुआ और वहां की सरकार और जनता ठीक राह पर चले तो कोई कारण नहीं कि दक्षिण एशिया का यह देश विकास की राह पर चल पायेगा और इसका सबसे ज्यादा लाभ अगर किसी देश और उसके देशवासियों को होगा तो वह पाकिस्तान ही है. लेकिन इसके साथ यह भी जोड़ा जाना चाहिए अगर इमरान खान की मंशा एक - दो प्रतीकात्मक काम करके अपने आतंकवाद के एजेंडे पर लौटना ही है तो फिर उसे इस दिखावे से कोई लाभ नहीं मिलने वाला है. इसीलिए बेहतर होगा कि पाकिस्तान अपनी बेहतरी खुद समझें और उस राह पर आगे बढ़े.

-विंध्यवासिनी सिंह 

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