google.com, pub-7859222831411323, DIRECT, f08c47fec0942fa0 क्या ये कट्टरपंथ की आहट है?

क्या ये कट्टरपंथ की आहट है?





अभी कुछ दिनों पहले ही सुरक्षा एजेंसियों ने पंजाब में संभावित हमले को लेकर एक अलर्ट जारी किया था हालाँकि राज्य सरकार का कहना है कि सुरक्षा की दृष्टि से पंजाब में हाई अलर्ट लगा दिया गया था लेकिन आज एक आतंकी हमले में 3  लोगों को अपनी जान गवानी पड़ी है. ज्ञात हो कि पंजाब के अमृतसर के एक गांव राजासांसी में निरंकारी भवन पर ग्रेनेड से हमला हुआ धमाका हुआ है. इसमें कम से कम 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि 10 घायल हो गए हैं. बताया जा रहा है कि दो अज्ञात बाइकसवारों ने निरंकारी भवन में चल रहे साप्ताहिक  सत्संग के समय ग्रेनेड से हमला कर दिया. हालाँकि अभी तक किसी आतंकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है लेकिन इस घटना के बाद शक की सुई तमाम दिशाओं में घूम रही है. कहीं इस घटना के सन्दर्भ में आतंकी मूसा का नाम आ रहा है, तो कोई इसमें पाकिस्तान का हाँथ बता रहा है, इतना ही नहीं आम आदमी पार्टी के विधायक एचएस फुल्का ने तो सीधे तौर पर सेनाध्यक्ष विपिन रावत पर ही शक कर डाले हैं. वहीं सब के बीच सबसे अधिक सुगबुगाहट हो रही है सिख कट्टरपंथ की.   
इसी साल यानि जून 2018  से ही पंजाब के फ़रीदकोट ज़िले के बरगाड़ी गांव में कुछ लोग पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह  बादल के साथ ही उनके शासन के समय कार्यरत पुलिस डिपार्मेंट के अधिकारीयों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. इन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 2015 में हुए धार्मिक ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब के अपमान के मामले में बादल सरकार ने कोई कार्यवाई नहीं की. बता दें कि 2015 पंजाब के कुछ शहरों में गुरुग्रंथ साहिब के फटे हुए पन्ने सड़कों पर मिले थे. वहीँ इस तरह के प्रदर्शन को लेकर कहीं न कहीं इस बात की चर्चा भी हो रही है कि अपनी राजनीतिक महत्वाकांछा के लिए फिर से अलगाववाद और समाज को बाँटने की राजनीति पर जोर दिया जा रहा हैं.

एसजीपीसी से बादलों के दबदबे को ख़त्म करने का दबाव 

साल 1925 में गठित शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी यानि एसजीपीसी में कुछ समय से बादल परिवार ने अपनी पैठ बना ली हैं, इसके उलट पिछले 30 सालों से कांग्रेस सिख धार्मिक मामलों और एसजीपीसी में एंट्री के लिए हाँथ पैर मार रही है. अब जब मौजूदा समय में कांग्रेस की सरकार है और मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह अक्सर यह बयान देते हुए दिख जा रहे हैं कि वो एसजीपीसी से बादलों को निकाल फेंकना चाहते हैं. अमरिंदर सिंह की इस छटपटाहट को जानकर कट्टरपंथियों के बढ़ावे के रूप में देख रहे हैं. क्योंकि कट्टरपंथी ध्यान सिंह मंड नेतृत्व में चल रहे बरगाड़ी के इस प्रदर्शन को लेकर मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह कुछ ज्यादा गंभीर नहीं लग रहे हैं. हालाँकि जानकारों का कहना है कि इस तरह के बे रोकटोक प्रदर्शन से कट्टरपंथ की आग को एक बार फिर से आग न दी जाये. क्योंकि पंजाब पहले ही इस आग का शिकार हो चूका है और सिर्फ पंजाब ही क्यों पुरे देश को इस आग की तपिस महसूस हुई थी. बता दें कि पंजाब को भारत से अलग देश बनाने के लक्ष्य से अभी देश और विदेश में कई सारी  संस्थाएँ काम कर रही हैं जिनमे से प्रमुख है, रेफरेंडम 2020 तथा सिख्स फॉर जस्टिस. अभी इसी साल जून में हथियारों और पोस्टरों के साथ पंजाब के बटाला में तीन खालिस्तान समर्थकों को पुलिस ने  गिरफ्तार किया है. ये तीनों सिख्स फॉर जस्टिस से सम्बन्ध रखते हैं. वहीं इन कट्टरपंथियों का प्रदर्शन भारत में ही नहीं बल्कि कनाडा इंग्लैंड समेत अन्य देशों में प्रदर्शन तक भी फैला है. ऊपरी तौर पर देखने से लगता है कि पंजाब को अलग खलिस्तान बनाने की मांग ने दम तोड़ दिया है लेकिन इस तरह के संगठनों के सक्रीय होने और इनके समर्थकों द्वारा लगातार रैलियों के सम्बोधित करने को सिरे से नाकारा नहीं जा सकता है. इसलिए पंजाब में मौजूदा कांग्रेस सरकार अभी से एक्टिव हो जाये तो जून 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार जैसी घटना के भविष्य में होने की सम्भावना कम हो जाएगी.

-विंध्यवासिनी सिंह 





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