google.com, pub-7859222831411323, DIRECT, f08c47fec0942fa0 अवैध बूचड़खाने- क्या है इनकी हकीकत - Slaughterhouse In Uttar Pradesh

अवैध बूचड़खाने- क्या है इनकी हकीकत - Slaughterhouse In Uttar Pradesh



अवैध बूचड़खाने- क्या है इनकी हकीकत - Slaughterhouse In Uttar Pradesh : CM Yogi 


देश में मोदी प्रदेश में योगी! ये नारा खूब उछला यूपी चुनाव के दौरान और बीजेपी ने भी लोगों के भावनाओं  का ख्याल रखते हुए 'योगी आदित्यनाथ' को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया. और अब जब से योगी सीएम बने हैं तो वो अपनी फायर ब्रांड स्टाइल में धड़ाधड़ फैसले लिए जा रहे हैं. पहले एंटी रोमियो स्क्वाड और अब अवैध बूचड़खाने बंद. योगी के इस फैसले को लोग अलग नजर से देख रहे हैं कुछ लोग इसे बेजुबानों पर अत्याचार की रोक मान रहे हैं तो वहीँ कुछ लोग हिंदुत्वादी छवि को वजह मान रहे हैं. अब जब ये मुद्दा मार्किट में गरम हैं तो आईये एक नजर डालते हैं उत्तर प्रदेश में बूचड़खानों के विभिन्न पहलुओं पर.

देश का दूसरा सबसे बड़ा बूचड़खाना- हालाँकि उत्तर प्रदेश भले ही जनसँख्या की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा राज्य हैं मगर बूचड़खाने के मामले में महाराष्ट्र सबसे आगे हैं.  महाराष्ट्र में जहां 316 बूचड़खाने हैं  वहीँ उत्तर प्रदेश में 285 बूचड़खाने हैं. आपको जान करआश्चर्य होगा कि 285  में से लगभग  40 ही ऐसे बूचड़खाने हैं जिनके पास केंद्र सरकार से लाइसेंस प्राप्त और रजिस्टर्ड हैं. इनमें सबसे ज्यादा, अलीगढ़ (7), गाजियाबाद (5), उन्नाव (4), मेरठ (3) और सहारनपुर (2) में हैं. इसके अलावा बाराबंकी, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, गौतमबुद्ध नगर, हापुड़, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, झांसी, लखनऊ और बुलंदशहर में एक-एक बूचड़खाना रजिस्टर्ड है.
इन सभी स्लॉटर हाउस में बफैलो यानी की भैंस ही काटे जाते हैं. आपको बता दें की यूपी में गौ हत्या प्रतिबंधित हैं इसलिए यहाँ बीफ के रूप में केवल भैंस का ही मांस मिलता हैं.

क्या है इनसे आय - इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक यूपी के एनिमल हसबेंडरी डिपार्टमेंट के आंकड़े बताते हैं कि यूपी ने साल 2014-15 में 7,515 लाख 14 हज़ार किलो भैंस के मीट का उत्पादन किया. साथ ही 1171 लाख 65 हज़ार किलो बकरे का मीट और 230 लाख 99 हज़ार किलो भेड़ के मीट का उत्पादन किया था. इसके अलावा 1410 लाख 32 हज़ार किलो सुअर के मांस का भी उत्पादन किया था. इन सब से होने वाली सालाना आय लगभग 17 हजार करोड़ आंकी गयी हैं. अब जब हम बिना लाइसेंस वाले बूचड़खानों की संख्या पर नजर डालते हैं तो ये भरी संख्या में मौजूद हैं. अब ऐसे में जब ये बंद हो जायेंगे हो जाहिर सी बात हैं इनसे होने वाले सलाह आय में भी बड़ी गिरावट आएगी.


अवैध बूचड़खाने- क्या है इनकी हकीकत - Slaughterhouse In Uttar Pradesh 
कितने लोगों के रोजगार पर संकट - बुनियादी तौर पर इसका कोई ठोस आंकड़ा उपलब्ध नहीं है मगर ख़बरों की मानें तो लगभग 75 हजार लोगों का रोजगार जुड़ा हुआ है उत्तरप्रदेश में स्थित अवैध बूचड़खानों से. एक तो वैसे ही यूपी बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहा है और आंकड़ों की की मानें तो यहाँ लगभग 7 करोड़ युवा बेरोजगार है. अब ऐसे में बूचड़खानों के बंद होने से एकाएक रोजी -रोटी की समस्या उत्पन्न हो जाएगी और उन लोगों के लिए काफी मुश्किल भरा निर्णय होगा जो लोग इस व्यवसाय से जुड़े हैं. 

चमड़ा व्यवसाय भी होगा प्रभावित- अपने देश सहित विदेशों में भी लोग चमड़े से बने सामानों को  बहुत शौक से इस्तेमाल करते हैं. उत्तर प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहा जाने वाला शहर कानपूर अपने चमड़े के कारोबार के लिए प्रसिद्ध है और यहाँ पर बड़े पैमाने पर चमड़े का सामान बनता है. ना केवल  कानपूर बल्कि पुरे देश के चमड़े कारोबारियों को कच्चे माल की आपूर्ति करता है उत्तर प्रदेश. अनुमानतः सलाना चमड़े का निर्यात 78546 करोड़ रुपये का होता हैं. जैसा की हम जानते हैं चमड़ा व्यवसाय के लिए चमड़ा इन्ही बूचड़खानों से उपलब्ध होता हैं और अगर भारी मात्रा में बूचड़खाने बंद हुए तो निश्चित ही इसका असर चमड़ा उद्योग पर पड़ेगा.

आवारा पशुओं से बढ़ेगी समस्या - आप अगर बड़े शहरों में देखेंगे तो सुबह -शाम सड़कों पर आवारा पशुओं का घूमना आम बात है. कुछ इनमें से  बेकार होते हैं तो कुछ वो दुधारू पशु भी होते है जिन्हें लोग दूध निकालने के बाद सड़कों पर छोड़ देते है ताकि ये जानवर इधर -उधर भटककर अपना पेट भरते हैं और शाम को दूध देंने के लिए अपने निश्चित स्थान पर पहुँच जाते हैं.अब जब दुधारू पशुओं को लोग बांध कर नहीं खिला पाते तो जब ये बूढ़े और बेकार होते होंगे तो इनका क्या होता होगा. बेकार हो जाने पर लोग इन से पीछा छुड़ा लेते हैं और ये लावारिश जानवर सड़कों पर पड़े -पड़े लोगों के परेशानी का कारन बनते हैं. अक्सर स्लॉटर हाउस वाले इन्हें ले जाते हैं मगर जब ये बंद होंगे तो सड़कों पर आवारा जानवरों की संख्या बढ़ना तय है.

किसानों की समस्या - अवैध बूचड़खानों के बंद हो जाने से किसानों के सामने भी एक अहम् सवाल ये खड़ा हुआ है कि वो अपने अनुपयोगी जानवरों का क्या करेंगे. जैसा कि हम जानते हैं किसान मुख्यरूप से पशुपालन अपने जीविकोपार्जन के लिए करता है मसलन गाय और भैंस दूध उत्पादन के लिए और बैल खेती के लिए, हालाँकि बैलों पर आधारित खेती लगभग बंद हो गयी है. फिर भी दुधारू पशुओं को वो बूढ़े और बेकार हो जाने के बाद बूचड़खानों को बेच कर कुछ पैसे बना लेता था. मगर अवैध बूचड़खानों के बंद हो जाने से जाहिर तौर पर पशुओं को  बेच पाना मुश्किल होगा और ऐसे में इन्हें घर पर रख कर चारा खिलाना भी लगभग नामुमकिन है.


ये तो हो गए बूचड़खानों के बंद होने से होने वाले लोगों के नुकसान मगर हम  अवैध बूचड़खाने की वजह से होने वाली परेशानियों पर नजर डालें तो वो निम्न है. 

प्रदुषण के लिए जिम्मेदार हैं बूचड़खाने - लोगों की समस्यों से इतर अगर हम प्रकृति के बारे में बात करें तो बूचड़खाने से निकालने वाले अपशिष्ट पदर्थों से भारी मात्रा में प्रदुषण फैलता है.इन अपशिष्ट पदार्थो को अगर बहाया जाता है तो जल प्रदुषण होता है तो वहीँ इनके सड़ने से वायु प्रदुषण की समस्या होती है. नदियों के किनारे बसे शहरों की बहुत बड़ी समस्या है बाढ़ के दिनों में ये अपशिष्ट पदार्थ बह कर लोगों के घरों में घुस जाता है तो वहीँ अक्सर सीवर जाम की वजह भी बनता है. हालाँकि लाइसेंस वाले बूचड़खानों के लिए नियम तो तय हैं मगर अवैध बूचड़खाने धड़ल्ले से नियमों का उलंघन करते हुए सिर्फ अपने मुनाफे पर ध्यान देते है.
 
पेट की बीमारियों की वजह - यूपी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऐक्ट 1959 के मुताबिक, यह स्थानीय निकायों की अनिवार्य जिम्मेदारी है कि वे लोगों को ताजा और साफ सुथरा मांस उपलब्ध कराएं. लेकिन जब ये बूचड़खाने ही बैद्य नहीं हैं तो फिर इनकी निगरानी कौन करेगा कि यहाँ उत्पादित होने वाले मांस मानकों पर खरा उतारते हैं या नहीं. अक्सर ये देखा जाता है कि कम दाम में ये अवैध बूचड़खाने अत्यधिक बूढ़े और बीमार पशुओं का मांस भी बेच देते हैं. जिससे पेट की तमाम बीमारियों सहित अल्सर होने का खतरा भी बढ जाता है. इसलिए इन अवैध बूचड़खानों को कानून के दायरे में लाकर लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने से रोकना उचित है.


उत्तर प्रदेश में सीएम योगी ने अवैध बूचड़खानों को बंद करने के आदेश जारी क्र दिए हैं जिसके विरोध में तमाम व्यापारी सड़को पर प्रदर्शन भी कर रहे हैं. अब देखना होगा कि योगी इसे कैसे सफल बनाते हैं और इससे उत्पन्न हुयी बेरोजगारी की भरपाई कैसे करते हैं. 
अवैध बूचड़खाने- क्या है इनकी हकीकत - Slaughterhouse In Uttar Pradesh : Ban

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