google.com, pub-7859222831411323, DIRECT, f08c47fec0942fa0 क्या स्टार प्रचारक तक ही सिमित रहेंगी -डिम्पल -प्रियंका! - Up Election 2017

क्या स्टार प्रचारक तक ही सिमित रहेंगी -डिम्पल -प्रियंका! - Up Election 2017




Dimpal -Priyanka 

इस बार के चुनाव में कुछ खास तो है, जहाँ हर बार चुनावी मुद्दे की चर्चा होती थी वहीँ इस बार चर्चा महिला स्टार प्रचारकों को   लेकर हो रही है. उत्तर प्रदेश जैसे राज्य जहाँ औरतें बेसिक अधिकारों के लिए भी संघर्ष कर रही हैं के लिए तो और भी खास है ये मुद्दा. एक तरफ जहाँ सपा की तरफ से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी और लोकसभा की सदस्य डिम्पल यादव हैं तो वहीँ दूसरी तरफ देश की सबसे बड़ी और पुरानी पार्टी कांग्रेस ने प्रियंका गाँधी को उतारा है. कांग्रेस और सपा गठबंधन का पूरा फोकस होगा उत्तर प्रदेश की युवा और महिला वोटरों को लुभाना, क्योंकि उत्तर प्रदेश में इस समय युवा वोटरों की संख्या ज्यादा है. और जहाँ तक महिला वोटरों की बात है तो 2012 के विधानसभा चुनाव में पहली बार महिलाओं ने पुरुषों के मुकाबले 15 फीसदी ज्यादा वोट डालकर अपनी मौजूदगी का एहसास करा दिया था. और यूपी ही क्यों हाल के तमाम चुनावों में महिला वोटर्स ने चुनावी परिणाम को प्रभावित करने की दिशा में अहम रोल निभाया है. बिहार में नीतीश कुमार ने भी शराबबंदी और महिलाओं को पंचायत और नौकरी में आरक्षण के वादों से अपनी तरफ खिंचा था.

 हालाँकि सपा ने पिछले चुनाव में लैपटॉप बांटा था और युवाओं में पैठ बनायीं थी, ठीक वैसे ही इस बार भी औरतों को ध्यान में रख कर कुकर और मोबाईल देने का वादा किया गया है. चलो ठीक है बहुत सारी गरीब महिलाओं को इन सामानों से सुविधा जरूर मिलेगी लेकिन क्या आज के बदलते समय में जहाँ औरतें मर्दों के बराबर कन्धा से कन्धा मिला के आगे बढ़ना चाहती है वहां ऐसे छोटे -मोटे सामान देकर फुसलाने की कोशिश तो नहीं की जा रही है. जहाँ तक डिम्पल के बारे में उनके समर्थकों के द्वारा सुनने को मिलता है कि वो बहुत ही प्रगतिवादी सोच की हैं और वह अखिलेश के हर बड़े फैसले में साथ रहती हैं. यहाँ तक कि हार्वर्ड प्रोफेसर स्टीव जॉर्डिंग के साथ स्‍ट्रैटजी बनाने में भी वह अहम रोल निभाती हैं. यहाँ तक कि  प्रशांत किशोर के साथ कांग्रेस गठबंधन को अखिलेश के साथ हुई पहली मीटिंग में भी वह मौजूद थीं.  आज जब उन्हें यूपी में उन्हें महिलाओं का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला है तो उन्हें कुकर और फोन में क्यों उलझाया जा रहा है. 
ठीक यही हालात प्रियंका के साथ भी है, हालाँकि वो सिर्फ सिमित क्षेत्र में ही एक्टिव रही हैं फिर भी जब वो चुनावी रैलियों में होती हैं तो लोगों के मन में उम्मीद बंध जाती है, लोगों को लगता है कि प्रियंका उनके लिए कुछ कर सकती है. और उम्मीद करें भी क्यों न राजनीति में न होते हुए भी प्रियंका देश के सबसे बड़े राजनैतिक घराने की बेटी हैं.
gangrape demo pic


और जब दो बड़े राजनैतिक घराने की बहु -बेटी एक साथ एक मंच से लोगों संबोधित करेंगी तो  कैसे भूल जाएँगी की यहाँ महिलाओं को कुकर से ज्यादा सुरक्षा की जरुरत है. फोन से ज्यादा शिक्षा की जरुरत है.
कैग की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2010-11 से लेकर 2014-15 के बीच प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में 61 प्रतिशत की बढोत्तरी हुई है. उत्तर प्रदेश में हर 15 मिनट में एक आपराधिक मामला दर्ज किया जाता है. उत्तर प्रदेश का अपराध दर 38.4 है तो वहीँ महिलाओं की साक्षरता दर 56.4 फीसदी.
रोज कहीं न कहीं बलात्कार और शोषण की ख़बरें तो जैसे आम बात है. अभी कुछ ही दिन हुए बुलंदशहर की घटना को जिसने पुरे देश को हिला के रख दिया था. ऐसे में क्या यूपी की महिलाएं ये उम्मीद न करें कि डिम्पल और प्रियंका की जोड़ी उनके सुरक्षा और शिक्षा की दिशा में कुछ ठोश कदम उठायें और ये दिखादें कि वो  सिर्फ भीड़ जुटाने का माध्यम नहीं बल्कि बदलाव का माद्दा भी रखती है.


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