google.com, pub-7859222831411323, DIRECT, f08c47fec0942fa0 साथ मेरा निभा रहा

साथ मेरा निभा रहा





दर्द मेरे वो मिटा गया,मुझे जीना सीखा रहा
जो चोट लगी है मुझे, महसूस वो कर रहा

जिंदगी बड़ी खूबसूरत है,उसे जन्नत बना रहा
कितना अनोखा बंधन है,खामोश रह के सब कह रहा

रह ना पाएगा गम कभी,अहसास वो करा रहा
साये की तह बन के,साथ मेरा निभा रहा

-विंध्यवासिनी सिंह




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