google.com, pub-7859222831411323, DIRECT, f08c47fec0942fa0 111 साल की मां बनी 75 साल की बेटी का सहारा

111 साल की मां बनी 75 साल की बेटी का सहारा



बदलते समय के साथ जहां संयुक्त परिवारों का विघटन हो रहा है, वहीं बच्चों को किस्से-कहानी और अपने अनुभव सुनाने वाले बुजुर्गो की कमी महसूस हो रही है. ऐसे में आज भी कुछ  बुजुर्ग हैं, जो अपने बुजुर्ग माता-पिता की सेवा में लगे हैं और इस उम्र में भी माता-पिता की छत्रछाया के सुख को सर्वोपरि मानते हैं.
111 साल की कांताबाई अपनी 75 साल की बेटी शांताबाई का सहारा हैं. अखंड नगर में रहने वाली कांताबाई भले ही कुछ कामकाज नहीं कर पातीं, लेकिन परिवार से प्रताड़ित अपनी बुजुर्ग बेटी को ममता की छाया देती हैं. बेटी कुछ घरों में खाना पकाकर अपना और मां का पेट पाल रही हैं.
पिछले दिनों सामाजिक न्याय विभाग और नगर निगम द्वारा अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के उपलक्ष्य में सौ साल से अधिक उम्र के वृद्धों का सम्मान किया गया. इसमें 111 वर्ष की कांताबाई सबसे उम्रदराज थीं. जहां एक तरफ वृद्धों को परिवार में प्रताड़ना के मामले सामने आते हैं वहीं चंद परिवार ऐसे भी हैं, जो बुजुर्गो की छत्रछाया में फल-फूल रहे हैं.
109 साल की मां की देखभाल करती है 60 साल की बेटी
साउथ तोडा की रहनेवाली 60 साल की शेरबानो 109 साल की मां मुमताज बी की देखरेख करती हैं. बेटी होने के बावजूद वह बेटे का फर्ज निभा रही हैं. वह कहती हैं कि हो सकता है मां की सेवा करने से जन्नत नसीब हो जाये. इसी तरह पालिया के पास बगानगांव निवासी 65 वर्षीय हरिप्रसाद पाठक 104 वर्षीय मां अयोध्याबाई के साथ साये की तरह रहते हैं. उन्होंने बताया कि बहुत कम लोगों को इतने सालों तक मां की सेवा नसीब होती है.

कहती हैं मां-बेटी
बेटी शांताबाई ने बताया- मेरे तीन बेटे हैं लेकिन कोई साथ नहीं रहता. पति की मृत्यु हो चुकी है जबकि वह अपनी मां की इकलौती संतान हैं. मां ही उनके लिए सहारा हैं. दोनों अपनी जिंदगी आनंद से जी रही हैं. उधर, मां कांताबाई को इस उम्र में भी कोई बीमारी नहीं है. वे कहती हैं कि मैं पूरी तरह स्वस्थ हूं. यह देशी घी और दूध का कमाल है लेकिन अब यह भी मिलावटी हो चुके हैं.



courtesy-prabhatkhabar.com


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