एक्सप्रेस-वे पर नियमों का पालन सुनिश्चित हो

नोएडा से आगरा यमुना एक्सप्रेस वे पर एक बस के नाले में गिरने से 2 दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो गई है। यह कोई पहला हादसा नहीं है जो इस एक्सप्रेस-वे पर घटा हो, निश्चित रूप से देश तेजी से विकास कर रहा है और इसके विकास के लिए चौड़ी और बिना किसी डिस्टरबेंस के तेज रूट वाली सड़कें आवश्यक हैं। लेकिन इन सड़कों पर नियम पालन की जवाबदेही किसकी होगी? आज के समय में तेज स्पीड वाहन आ रहे हैं और मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि यमुना एक्सप्रेसवे जैसे बेहतरीन रास्तों पर ओवर स्पीडिंग की समस्या बहुत आम है। कहने को तो इन सड़कों पर कैमरे लगे रहते हैं लेकिन जब भी आप इस एक्सप्रेस-वे से यात्रा करेंगे तो आप यह महसूस करेंगे कि हर दूसरा व्यक्ति यहां ओवरस्पीडिंग करता है। 

इन सड़कों पर कार की रफ्तार की लिमिट जहां 100 किलोमीटर प्रति घंटे हैं वहीं बस इत्यादि बड़ी गाड़ियों की स्पीड लिमिट 80 किलोमीटर प्रति घंटा है लेकिन इतने पर कोई भी नहीं चलता है कई बार लोग इसे डबल स्पीड पर चलते हैं। आखिर उनकी समस्याओं पर लगाम  कौन लगाएगा। निश्चित रूप से ओवरस्पीडिंग के लिए भारी जुर्माना किया जाना चाहिए, इससे फायदा होगा और एक्सीडेंट की समस्याओं में कमी आएगी। वहीं दूसरी ओर इन सड़कों पर एक्सीडेंट से निजात पाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस भी कैंसिल किया जाना चाहिए। जिस प्रकार से दिल्ली तथा अन्य  महानगरों में सड़कों का ट्रैफिक तोड़ने पर 3 महीने या उससे अधिक समय के लिए ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड करने का प्रावधान है ठीक उसी प्रकार एक्सप्रेस वे पर भी स्पीड लिमिट तोड़ने पर ड्राइविंग लाइसेंस क्यों नहीं रद्द किया जाना चाहिए।

एक्सीडेंट के आंकड़ों की बात की जाए तो यमुना एक्सप्रेस पर हुए अब तक की दुर्घटनाओं के लिए आईटीआर डाल कर पता लगाया गया है कि इसके निर्माण के समय यानि कि साल 2012  से लेकर साल 2018 तक 5 हजार से ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं जिनमें 8 ,191 लोग अपनी जिंदगी गँवा चुके हैं। वहीँ इसके बाद की हुई दुर्घटनाएं और मौतें अभी अलग हैं। एक अन्य आंकड़ें के अनुसार इस साल 2019 में अबतक 94  लोग मारे जा चुके हैं। निःसंदेह ये आंकड़े रूह को कंपा देने वाले हैं और सरकार तथा जनता दोनों को इस विषय में गंभीरता से सोचने की जरुरत है कि कैसे रोका जाये इस मौत के बढ़ते आंकड़े को।

हादसों की प्रमुख वजहें 

किसी भी सड़क पर हादसे की सबसे प्रमुख वजहों पर नजर डालें तो आप पाएंगे कि ओवरस्पीडिंग इसकी प्रमुख वजह बनती है। यमुना एक्सप्रेस- वे की लम्बी -चौड़ी और कम भीड़- भाड़ वाली सड़कें भी लोगों को लुभाती हैं गति की मर्यादा को तोड़ने के लिए। अगर आप यमुना एक्सप्रेस -वे पर सफर करेंगे तो देखेंगे कि यहाँ चालक तय सीमा से दुगनी स्पीड में गाड़ी चलाते हैं इतना ही नहीं ट्रैफिक नियमों की ऐसी धज्जियाँ उड़ाई जाती हैं कि जैसे इसके बारे में किसी को कोई जानकारी ही न हो। सुरक्षा की दृष्टि से एक्सप्रेस-वे पर हर थोड़ी दूरी पर पट्टिका लगाकर जानकारी दी गयी हैं कि किस वाहन को किस लेन में चलना हैं और ओवरटेक करते समय किस लेन का प्रयोग करना हैं। बावजूद इसके लोग किसी भी लेन में गाड़ी घुसा देते हैं और कहीं से भी हाई स्पीड में ओवरटेक करने लगते हैं। ऐसे में अपने साथ -साथ दूसरे वाहन को भी दुर्घटनाग्रस्त कर देते हैं।
इसके आलावा एक्सप्रेस -वे पर जाने से पहले वाहनों के टायरों की जाँच और क्वालिटी को चेक ना करना भी दुर्घटना का कारण बनता है।


यमुना एक्सप्रेस -वे  पर क्या है सुरक्षा के इंतजाम?
165 किलोमीटर लम्बा यह एक्सप्रेस-वे उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ को देश की राजधानी दिल्ली से जोड़ता है। सुरक्षा की दृष्टि से इस एक्सप्रेस-वे पर 19 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, इसके साथ ही इसपर इंसिडेंट डिटेक्शन सिस्टम से लैश 25 कैमरे भी लगाए गए हैं। इतना ही नहीं ओवरस्पीडिंग की जाँच के लिए और नंबर प्लेट की रीडिंग के लिए 30 कैमरे भी लगाए गए हैं। इन सभी कैमरों से प्राप्त जानकारी का रिकार्ड एक्सप्रेस-वे पर बने तीनों टोलप्लाजा पर मौजूद रहता है।

क्या हो जरुरी कदम?
ट्रैफिक नियमों के उलंघन पर जिस प्रकार पूरे देश में जुर्माना तथा सजा तय है उसी प्रकार यमुना एक्सप्रेस -वे पर भी नियमों के उलंघन के लिए जुर्माना तय किया गया है जिसमें ओवरस्पीडिंग के लिए 400 से 1000 तक का जुर्माना तथा खतरनाक ड्राइविंग के लिए 1000 और एक्सप्रेस -वे के नियमों के उलंघन के लिए 500 रूपये के जुर्माने का प्रावधान है। अब बस जरुरत है तो बस इन नियमों के सख्ती से पालन की। एक बार अगर एक्सप्रेस -वे अथॉरिटी नियमों के उलंघन के लिए सख्त कदम उठाने लगी तो निःसंदेह ही दुर्घटनाओं में कमी आएगी। इसके साथ ही सबसे बेसिक जिम्मेदारी सरकार की है कि ड्राइविंग लाइसेंस के लिए ऐसे कदम उठाये जिससे किसी को भी आसानी से गाड़ी चलाने का लाइसेंस ना मिले खासकर कमर्शियल वाहनों तथा हैवी वाहनों को चलाने का लाइसेंस। इसमें कोई दो राय नहीं है कि गाड़ी चलाने वाले 90 प्रतिशत लोगों को ट्रैफिक साइन जो रोड के किनारे लगे होते हैं उनके बारे में जानकारी नहीं होती है। अब ऐस में किस प्रकार से रोड एक्सीडेंट में कमी की कल्पना की जा सकती है।

-विंध्यवासिनी सिंह 






  

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