सस्ती टिकट के साथ फिल्म देखिये और सब भूल जाईये

साल की सबसे बड़ी खबर कहा जाये तो गलत नहीं होगा कि हिंदी हार्टलैंड के 3 राज्यों में चुनाव हारने के बाद केंद्र की भाजपा सरकार ने जीएसटी रेट कम कर दिया है. बाकी चीजें तो अपनी जगह है किंतु इसमें सबसे दिलचस्प रहा फिल्म टिकट के जीएसटी दरों को लगभग आधा कर दिया जाना. नए नियम के अनुसार 100  रुपए से कम के टिकट पर 12% जीएसटी लगेगा तो ₹100 से ज्यादा के टिकट्स पर 28% की जगह मात्र 18 परसेंट जीएसटी लगेगा. जाहिर है अब आप फिल्म देख सकेंगे एंजॉय कर सकेंगे और मंदी के ग़मों को भूल सकेंगे. नोटबंदी ना सही लेकिन जीएसटी का उपहार देकर सरकार इस समय काफी प्रशंसा बटोर रही है. और तो और  बॉलीवुड में निर्माताओं के समोसे लेकर अक्षय कुमार और अजय देवगन जैसे अभिनेता पीएम मोदी की दबाकर तारीफ कर रहे हैं. भाई तारीफ करने वाली बात तो है ही. 



वहीं एक और खबर आई है जिसके अनुसार दिल्ली में कार लेने वालों की पार्किंग चार्ज  खतरनाक स्तर तक बढ़ा दिया गया जिससे टैक्सी चालकों में जबरदस्त नाराजगी है. आप इन दरों को देखें तो समझ जाएंगे कि कमर्शियल व्हीकल पर किस प्रकार का बोझ पड़ने वाला है. पहल जहाँ मात्र 4000 तक टैक्स लगता था वही अब नए नियम के बाद यह टैक्स  25000 तक हो सकता है. इतना ही नहीं  प्राइवेट व्हीकल लेने वालों को भी 75000 तक पार्किंग चार्ज देना पड़ सकता है. हालांकि दिल्ली जैसे महानगरों में पार्किंग की समस्या से निपटने के लिए एक बारगी ऐसा किया भी जा सकता है, किंतु जो टैक्सी चालक अपनी रोजी-रोटी इससे कमाते हैं उनके ऊपर इसका कितना विपरीत असर पड़ेगा यह बात समझने योग्य है. कहा तो यह भी जा रहा है कि पार्किंग को लेकर इतना दबाव बढ़ेगा तो बहुत संभव है कि दिल्ली का बहुत सारा व्यवसाय पड़ोसी राज्यों में भी शिफ्ट हो सकता है. बहर हाल सरकार ये सब चीजें समझने लगी तो फिर देश यहीं का यहीं क्यों रह जाता. 

ऐसा नहीं है कि इन सब मामलों में सिर्फ भाजपा सरकार ही आगे हो उधर मध्य प्रदेश के नए नवेले मुख्यमंत्री बने कमलनाथ ने यूपी बिहारियों को समस्याओं की जड़ बता डाला तो साथ ही किसानों की कर्जमाफी में भी घोटाला कर डाला. बताया जा रहा है कि उनकी कर्जमाफी में भी काफी झोल है क्योंकि कांग्रेस ने कर्जमाफी स्किम में 31 मार्च 2018 तक का टाइम बैरियर लगा दिया है. इसके अनुसार बताई गयी तारीख के बाद जिन किसानों ने कर्ज लिया है उनका कर्ज माफ़ नहीं होगा. जानकारों का कहना है कि  इससे किसानों को कुछ ज्यादा फायदा नहीं होने वाला है. ज्ञात हो कि कांग्रेस की कर्जमाफी से आस लगाए मध्यप्रदेश के खंडवा जिले के एक 45 वर्षीय आदिवासी किसान ने इसलिए आत्महत्या कर ली है क्योंकि उसके द्वारा लिया गया कर्ज 31 मार्च 2018 के बाद का है. अब कोई मरे या जिए उससे सरकार को क्या , उन्होंने 10 दिन के अंदर कर्ज माफ़ करने को कहा वो एक दिन में कर दिया और क्या चाहिए. 

यकीन नहीं होता ये वही राहुल गाँधी है जो चुनाव से पहले मंदसौर में किसानों की मृत्यु से विचलित हो उठे थे, लेकिन चुनाव के बाद उन्ही की स्किम की वजह से जान गंवाने वाले एक किसान की चर्चा तक नहीं.  ठीक ही है जब जनता इस प्रकार की हो कि वह आसानी से नेताओं की बात में  यकीन कर ले उसको फिर मूर्ख बनाया ही जाना चाहिए. किस चीज का रेट कम होना चाहिए किस चीज का ज्यादा होना चाहिए किस चीज में झोल  करना चाहिए या भारतीय नेताओं से बेहतर भला कौन जानता है. वह तो जनता है जिसे लॉलीपॉप दे दो वह खुश हो जाती है और जनता मूवी के टिकट, मोटर व्हिकल के पार्ट्स, 32 इंच वाली टेलीविजन स्क्रीन, कंप्यूटर, लिथियम आयन बैटरी वाले पावर बैंक, खेल के सामान और टायर्स सस्ते करने से खुश हो गई तो फिर इसमें बुरा ही क्या है.


विंध्यवासिनी सिंह 

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