शादी की संस्था' में बढ़ता 'विश्वास'



कहा जाता है कि धरती पर 84 लाख योनियाँ मौजूद है, और इन्ही योनियों को पार करते हुए अंत में मनुष्य का जन्म होता है. ये भी सब जानते हैं कि मनुष्य सभी जीव -जंतुओं से श्रेष्ठ है. अगर हम ध्यान दें तो आसानी से समझ सकते हैं कि अपनी निष्टा, कर्तव्य निभाने और ज़िम्मेदारियाँ निभाने की प्रवृति के कारण ही मनुष्य सबसे श्रेष्ठ है. उन्हीं जिम्मेदारियों में से एक है वैवाहिक जीवन को अपनाना. इस जिम्मेदारी में जहाँ दो अजनबी इंसान साथ मिलकर रहने, सुख-दुःख में भागीदारी और मौत तक साथ न छोड़ने का वादा करते हैं तो वहीं संतानोत्पत्ति के द्वारा अपनी पीढ़ी को भी आगे बढ़ाते है. शादी की यह परम्परा लगभग पुरे विश्व में अलग -अलग रूपों में मौजूद है. फिर ऐसा क्या हो गया कि आज की युवा पीढ़ी का शादी नाम की संस्था से विश्वास उठता जा रहा है. लोग शादी ना कर लिव इन रिलेशनशिप में रहना चाह रहे हैं. अब तो यह आम बात हो गयी है कि युवा पीढ़ी अपनी आधी उम्र बिना शादी के बिता दे रही है. ऐसे में  बॉलीवुड कलाकार रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण की शादी ऐसे लोगो के लिए उदहारण है जो यह मानते हैं कि जब सबकुछ मिल रहा है तो शादी की क्या जरुरत है.  दीपिका और रणवीर ही क्यों इस साल कई सारी बड़ी सेलिब्रिटीस ने शादी की है या करने वाले हैं, कुछ समय पहले ही अनुष्का और विराट कोहली, सोनम और आनंद आहूजा तथा नेहा और अंगद ने विवाह के बंधन में बंधने का निर्णय लिया. इसके साथ ही बॉलीवुड के साथ ही हॉलीवुड में तहलका मचाने वाली प्रियंका चोपड़ा भी अपने विदेशी मंगेतर निक जोनस के साथ जल्दी ही शादी करने वाली हैं. इन सेलिब्रिटीज को किस बात की कमी है जो विवाह संस्था में विश्वास दिखा रहे हैं. क्या इन्हे बिना विवाह के साथी की कमी थी या ये IBF तकनिकी से बच्चा पैदा नहीं कर सकते थे. लेकिन इन बड़े लोगों ने इस विवाह संस्था को अपनाया है तो जरूर इसमें कोई खास बात होगी. 


जिसको हम ऐसे समझ सकते हैं कि जिम्मेदारियां आपको मनुष्य मनुष्य बनती हैं. क्योंकि धरती पर तो जानवरों ने भी भी जन्म लिया है लेकिन हम इंसान उनसे बेहतर क्यों है? शायद इसलिए कि हम ज़िम्मेदारियाँ उठाते हैं, किसी के प्रति समर्पित रहते हैं.और यही वजह है कि मनुष्य कि श्रेणी सबसे उत्तम है. हमारे ग्रंथों में भी कहा गया है कि विवाह का उद्देश्य क्रमशः विषयाशक्ति से मुक्त होकर ईश्वर की और बढ़ना है. इसका सीधा सा अर्थ है कि जब हम किसी के साथ विवाह बंधन में बंधते हैं तो संयम धारण करने की क्षमता अपने आप बढ़ने लगती है. हम विषय विकारों से दूर किसी एक चीज़ पर ध्यान केंद्रित करने लगते है. और इन्ही गुणों के कारण हमें इंसान कहलाने का अधिकार प्राप्त हो जाता है. इसमें कोई शक नहीं है कि हम जिस समाज में रह रहे हैं वो समाज मानव जाति के अनवरत प्रयत्नों, संघर्षों, उपलब्धियों, अविष्कारों आदि के कारण बना है जिसमें मुख्य भूमिका विवाह का भी रहा है. जब मनुष्य को यह एहसास हुआ कि उसके लिए अकेले रहने की अपेक्षा झुण्ड में रहना सुरक्षित है तो उसने इसमें रहने के कुछ नियम बनाये जिससे समाज में समरसता बनी  रहे उन्ही में से एक है विवाह के नियम. ऐसा माना जाता है की मानव समाज में विवाह की शुरुआत  19  वीं शताब्दी में हुई. इससे पहले  किसी भी पुरुष को किसी भी महिला के साथ सम्बन्ध बनाने का अधिकार प्राप्त था. इसके साथ ही हिन्दू समाज में इस विचार ने जन्म लिया कि उनके बाद  उनकी  संतान उनका नाम को आगे ले जाएगी इसके साथ ही उनकी संपत्ति की देखरेख के साथ ही वृद्धावस्था में उन्हें सहारा भी  देगी. सिर्फ हिन्दू समाज ही क्यों पश्चिमी देशों में भी विवाह का चलन है विवाह में विश्वास है. आपको याद होगा कि हॉलीवुड के मशहूर कलाकार ब्रैड पिट और एंजलीना जोली का जब तलाक हुआ तो कैसे  ब्रैड पिट डिप्रेशन में चले गए थे. इसलिए ये कहना जरुरी है कि अगर किसी वजह से कहीं विवाह असफल होने  की खबर आती है  तो उससे निराश होने की बजाय उसके सकरात्मक पहलुओं के बारे में विचार किया जाना चाहिए. हुए इसमें कोई शक नहीं है कि दुनिया में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है वो विवाह संस्था की जगह ले सके.  इसी के साथ हम नवदम्पत्ति दीपिका और रणवीर के लिए शादी की देश सारी शुभ कामनाएं है और ये उम्मीद है की वो एक आदर्श पति-पत्नी साबित हो और युवा पीढ़ी के लिए आदर्श स्थापित कर पाने सफलता पाएं.


- विंध्यवासिनी सिंह  


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