सेल्फी ...जान से बढ़ कर है क्या?




सेल्फी...
वो फोटो जिसको खींचने में किसी दूसरे की जरुरत न पड़े यानि की अपने हाथों से ही अपनी फोटो खिंच जाये. लोगों के ऊपर इसका इतना क्रेज है कि अब बड़ी -बड़ी मोबाइल कंपनियां अन्य फीचर्स के साथ ही सेल्फी कैमरे की तरफ ज्यादा ध्यान देने लगी हैं. आपको भी अपने आस-पास ऐसे बहुत सारे नज़ारे देखने को मिल जायेंगे जब लोग दुनिया को भूल सेल्फी लेने में मशगूल हो जाते हैं. कई बार तो खतरनाक जगहों और तरीकों को अपनाने से भी गुरेज नहीं करते. वैसे सेल्फी से होने वाली दुर्घटओं की खबरें अक्सर आती रहती हैं मगर इस समय सबसे ज्यादा चर्चा में है दिल्ली का नवनिर्मित और बहुप्रतीक्षित 'सिग्नेचर ब्रिज'. जहाँ इस  ब्रिज की  खूबसूरती और खूबियों की चर्चा होनी चाहिए वहां इस पर होने वाले संभावित दुर्घटनाओं की चर्चा हो रही है. दिल्ली के साथ ही पूरे देश की शान बढ़ाने वाले सिग्नेचर ब्रिज से गुजरने वाला हर शख्स इसकी भव्यता को अपने कैमरे में कैद कर लेने की चाहत में नियम कानून की धज्जियां तक उड़ा रहा है. 'सिग्नेचर' सेल्फी लेने की इस होड़ के चलते ब्रिज के दोनों तरफ भीड़ लग जा रही है तो कोई पोल पर चढ़कर तो कोई पुल की मुंडेर पर खड़े होकर सेल्फी ले रहे हैं. इतना ही नहीं लोग ब्रिज को बतौर सेल्फी प्वाइंट इस्तेमाल कर रहे हैं जो कि गलत हैं.
वहीं अगर हम इस ब्रिज की खूबियों के बारे में बात करें तो यह ब्रिज असिमेट्रिकल केबल वाला भारत का पहला ओवरब्रिज है जिसका उद्घाटन 4 नवम्बर को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने किया है. ये ओव​रब्रिज आउटर रिंग रोड को वजीराबाद से जोड़ता है. मगर अफ़सोस इस ब्रिज को शुरू हुए हफ्ते भी नहीं बीते कि लोग इसका भी मिसयूज शुरू कर दिए हैं.
अगर हम सावधानी पूर्वक लोगों की ऐसी मानसिकता और सेल्फी के क्रेज को समझें तो कुछ चीजे बड़ी ही आसानी से सामने आती है जिनके बारे में चर्चा करना अस्वश्यक है. जिसमे सबसे पहला नंबर है इंटरनेट का.

इंटरनेट ने किया घी में 'आग' का काम 

यह कहना गलत नहीं होगा कि इंटरनेट ने लोकप्रियता के लिए नए रास्ते खोल दिए हैं. ऐसे में  इस नए रास्ते पर लोग आंख मूंद कर चल पड़े हैं  उपरोक्त  घटना को इसका एक उदाहरण समझा जा सकता है.  इंटरनेट के माध्यम से लोगरातों रात लोकप्रिय हो जाना चाहते है. हालाँकि यह गलत भी नहीं है गलत है तो इसका तरीका और मानसिकता अगर हम  यूट्यूब की ही बात करें तो केवल इस प्लेटफॉर्म पर  1.3 बिलियन से अधिक यूजर हैं, तो वहीं  फेसबुक पर 2 बिलियन से अधिक एक्टिव यूजर हैं.  यु-ट्यूब और फेसबुक के अलावा  दूसरे इंटरनेट-प्लेटफॉर्म्स भी यूजर्स की अच्छीखासी भीड़ है. ऐसे में सोशल मिडिया प्लेटफॉर्म बड़ी मार्किट के रूप में मौजूद है. वहीं इसकी सबसे बड़ी खाशियत यह है कि ये प्लेटफॉर्म सभी के लिए बिलकुल ओपन है. शायद यही वजह है कि युवावर्ग इसके तरफ आकर्षित हो रहा है और किसी भी कीमत पर लोकप्रियता पाना चाह रहा है. लेकिन यह इतना भी सरल है जितना देखने में लगता है. युवावर्ग को यह समझना होगा कि कुछ भी अलग हट कर करने कि कोशिश में आप छड़िक सफलता तो जरूर हासिल कर लेंगे लेकिन यह लम्बे समय तक नहीं टिकता है.


मानवीय मूल्यों का संदेश जरुरी 
बचपन से ही हमें सिखाया जाता है कि हम जैसा करेंगे दूसरे भी वैसा ही अनुकरण करेंगे. इसलिए जब हम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कोई भी तस्वीर या कंटेंट डालते हैं तो यह याद रखना जरुरी हैं कि इसका असर दूसरों पर कैसा पड़ेगा. कहीं हम अनजाने में भीड़ को कुछ गलत करने के लिए तो नहीं उकसा रहे हैं.
कई बार देखने को मिलता हैं कि  ‘प्रैंक’ वीडियो बनाने के चक्कर में लोग  बच्चों और बूढ़ों तक को नहीं छोड़ते है और सामान्य मानवीय मूल्यों को भी ठोकर मार दे रहे हैं. इतना ही नहीं अक्सर ख़बरें आती हैं कि सड़क  के किनारे किसी का एक्सीडेंट हुआ हैं और वहां मौजूद लोग दुर्घटना पर लाइव विडिओ कर रहे हैं. और तो और सामने से आ रही ट्रेन के साथ भी लोग सेल्फी लेने कि कोशिश कर रहे हैं. इस सन्दर्भ में दुर्घटना की कई खबरें आ चुकी हैं. यहाँ यह बताना जरुरी हैं कि ‘सेल्फी’ लेते हुए जान जाने के मामले में भारत  का पहला स्थान हैं.




यह हमारे लिए किसी उपलब्धि से कम नहीं हैं कि तेज़ स्पीड इंटरनेट से हम मनोवांछित कार्यों को आसानी से कर पा रहे हैं. ऐसे में इसका उपयोग सार्थक कार्यों के लिए होना चाहिए न कि टाईमपास के लिए. सेल्फी लेना गलत नहीं हैं  लेकिन सेल्फी में खूबसूरती दिखे जो दूसरों को भी प्रेरित करे तब जाकर आप अच्छे फोटोग्राफर के साथ ही जिम्मेदार मनुष्य कहलायेंगे.
इसलिए एक बात समझना आवश्यक है कि सेल्फी तो लो लेकिन नियम में रहकर और सावधानी पूर्वक क्योंकि जब तुम ही नहीं रहोगे तो उस सेल्फी की क्या कीमत है?

-विंध्यवासिनी सिंह




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