जनता की भावनाओं को समझें - Lalu Yadav Soil Scam



 Lalu Yadav Soil Scam 

लगभग 360  करोड़ के चारा घोटाले के मामले  में जेल जा चुके बिहार के जाने -माने और आरजेडी के संस्थापक लालू यादव एक बार फिर सुर्ख़ियों में हैं. बिहार बीजेपी के नेता सुशिल मोदी ने आरोप लगाया है कि लालू यादव के परिवार ने अपनी निजी कंपनी का सामान अपने ही सरकारी विभाग के बेचा है वो भी बिना किसी टेंडर के. मोदी के अनुसार  पटना के सगुना मोड़ के पास एक शॉपिंग मॉल का निर्माण कराया जा रहा है. जमीन के मालिक जिस डिलाइट मार्केटिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड से हैं, उसके तीन डायरेक्टरों में लालू यादव के दोनों बेटे तेजप्रताप और तेजस्वी के साथ बेटी चंदा यादव भी हैं. यानि कि इसके हिस्सेदार लालू यादव के अपने बेटे और बेटी हैं. यही नहीं  इस जमीन पर निर्माण का काम जिस कंपनी को दिया गया है उसके मालिक भी राष्ट्रीय जनता दल के एक विधायक अबू दोज़ना हैं. इसमें झोल ये है कि इस मॉल में अंडरग्राउंड दो लेवल की पार्किंग है और उससे निकली मिट्टी को पटना चिड़ियाघर में लगाया गया. और इसका बिल बना है लगभग 90  लाख का. 
जैसा कि हम सब जानते हैं जेल से आने के बाद बिहार की जनता ने एक बार फिर से लालू यादव पर विश्वास दिखाते हुए उन्हें राजनीति में दूसरा मौका दिया है. यहाँ यह स्पष्ट करना जरुरी है कि बिहार में गठबंधन की सरकार है नितीश कुमार मुख्यमंत्री. शायद लालू यादव ये जानते थे कि उनके दमन पर लगे दाग की वजह से जनता उन्हें स्वीकार नहीं करेगी. और चतुराई दिखाते हुए वो भाजपा से रुष्ट हुए नितीश कुमार को झट से अपने पाले में मिला लिए. 

वो जानते थे कि नितीश के बेदाग छवि का फायदा मिलेगा और चुनाव में माहौल बनेगा. हालाँकि उनके उम्मीदों से बढ़कर बिहार की जनता ने गठबंधन के दो अन्य पार्टियों 'जेडीयू और कांग्रेस' से ज्यादा सीटों पर विजयी बनाया 'आरजेडी' को, और यहीं से शुरू हो गयीं लालू यादव की मनमानियां. सबसे पहले अपने छोटे बेटे को उपमुख्यमंत्री और बड़े बेटे को स्वास्थ्य मंत्री तथा अपने पार्टी के विधयकों को मनमर्जी के विभाग दिलवाये. खैर ये तो होना ही था राजद गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी जो बन कर उभरी थी. महागठबंधन को मिली सफलता का असर ये हुआ कि लालू यादव राष्ट्रिय स्तर पर महागठबंध की पैरवी करते फिर रहे हैं. मगर लालू यादव ये भूल गए कि जनता एक बार भावना में बह सकती है मगर बार -बार नहीं. ऐसे ही अगर फिर से घोटालों में उनके नाम आने शुरू हुए तो फिर राष्ट्रिय स्तर तो दूर की बात है बिहार में भी अपनी पैठ बनाये रखना मुश्किल हो जायेगा. 
courtesy: oneindia.com

एक तरफ जहाँ लालू यादव लगभग अपने हिस्से की राजनीति कर चुके हैं मगर उनके दोनों बेटों के राजनैतिक कैरियर का अभी आगाज ही हुआ है ऐसे में लम्बा सफर तय करने के लिए बेदाग और साफ सुथरी छवि की अत्यंत जरुरत पड़ेगी. लालू यादव अक्सर ये कहते रहते हैं कि आगे की राजनीति की बागडोर युवाओं को संभालना है लेकिन क्या ये युवा भी उसी तरह की घिसी -पीटी राजनीति करेंगे जैसी अब तक लालू यादव करते आये हैं. एक तरफ जहाँ नरेंद्र मोदी लगातार जातिऔर धर्म पर आधारित राजनीति की गणित को ध्वस्त करते हुए एक -एक राज्य पर कब्ज़ा करते जा रहे हैं ऐसे में बिहार कितने दिन तक दूर रहेगा. इसलिए वक़्त रहते राजनीति की दिशा को भांपने की जरुरत हैं ताकि लम्बे समय तक इसमें टिका जा सके.

खबरों की मानें तो नितीश कुमार ने मिटटी घोटाले की जाँच का आदेश दे दिया वो भी सरकारी माध्यमों से जिसको लेकर विपक्ष ने असंतोष भी जताया हैं. विपक्ष का कहना  हैं कि सरकारी तंत्र जाँच में पारदर्शिता नहीं अपनाएंगे. खैर चाहें परिणाम जो भी हो लेकिन अभी जहाँ राजनीति में आये दो दिन भी नहीं हुए लालू पुत्रों को और अभी से विवादों में फंसना ठीक नहीं हैं. और राजनीति को अपनी विरासत ना समझते हुए जनता की भलाई का थोड़ा सा ख्याल रखते हुए काम करने की जरुरत हैं. तभी भविष्य सुरक्षित हैं राजनीति में.

- विंध्यवासिनी सिंह




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