मैरिज रजिस्ट्रेशन क्यों जरूरी है ?







पूरी शानो-शौकत से आपने शादी तो कर ली, पर क्या उसका रजिस्ट्रेशन करवाया? कई अधिकारों को प्राप्त करने के लिए यह जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट सुशील कुमार जैन के अनुसार, ‘शादी के बाद चाहे संयुक्त बैंक खाता खुलवाना हो या स्पाउस वीजा चाहिए, वहां आपको विवाह पंजीकरण का प्रमाण पत्र दिखाना होगा। वैसे तो अपका शादीशुदा होने का प्रमाण आपकी शादी का कार्ड, फोटोग्राफ, पुजारी द्वारा शादी संपन्न कराने का प्रमाण पत्र आदि आपके पास होगा, लेकिन इतने सारे दस्तावेजों को सब जगह लेकर जाना संभव नहीं है। ऐसे में आपके विवाह का पंजीकरण प्रमाण पत्र आपको इन समस्याओं से निजात दिला सकता है। यह एक दस्तावेज आपको कई तरह के फायदे पहुंचा सकता है।’ 

 शादी के पंजीकरण के फायदे
 *भारतीय कानून के अनुसार यह आपके विवाहित होने का कानूनी प्रमाण है।
 *अगर आप शादी के बाद अपना सरनेम नहीं बदलना चाहतीं, तब यही दस्तावेज आपको शादी से संबंधित सभी कानूनी फायदे पहुंचाने में सहायक होगा। 
*संयुक्त बैंक खाता और जीवन बीमा करवा सकती हैं। 
*राष्ट्रीयकृत बैंक में लोन लेने में सहायक। 
*अगर पति सरकारी नौकरी में हैं, तो सरकार द्वारा दी जाने वाली सुविधा का उपयोग कर सकती हैं। 

 क्या है कानूनी ढांचा 
भारत में विवाह, दो विवाह अधिनियमों में से किसी एक अधिनियम के तहत पंजीकृत किया जा सकता है : हिन्दू विवाह अधिनियम (1955) या विशेष विवाह अधिनियम (1954)। हिन्दू विवाह के पक्ष अविवाहित या तलाकशुदा होने चाहिए या यदि पहले विवाह हो गया है तो उस शादी के समय पहली पत्नी या पति जीवित नहीं होने चाहिए। विशेष विवाह अधिनियम, विवाह अधिकारी द्वारा विवाह सम्पन्न करने तथा पंजीकरण करने की व्यवस्था करता है। हिन्दू विवाह अधिनियम केवल हिन्दुओं के लिए लागू होता है, जबकि विशेष अधिनियम भारत के सभी नागरिकों के लिए लागू होता है। 

 कैसे प्राप्त करें विवाह प्रमाण पत्र 

 हिन्दू विवाह अधिनियम के तहत विवाह के लिए पक्षों को, उस मैरिज रजिस्ट्रेशन सेंटर में जहां, पति-पत्नी में से कोई एक छह माह से रह रहा हो, आवेदन करना होता है। दोनों पक्षों को पंजीकरण के एक माह बाद तीन गवाहों के साथ मजिस्ट्रेट के सामने उपस्थित होना होता है। वहीं, विशेष विवाह अधिनियम के तहत उस रजिस्ट्रेशन सेंटर में आवेदन करना होता है, जहां पति-पत्नी में से कोई एक पिछले एक माह से रह रहा हो। उसके बाद रजिस्ट्रेशन सेंटर के बोर्ड पर इस शादी से संबंधित एक सूचना लगा दी जाती है। यदि इस शादी को लेकर कोई आपत्ति दर्ज नहीं करता है तो सूचना प्रकाशित होने के एक माह के बाद विवाह संपन्न हो जाता है। यदि कोई आपत्ति प्राप्त की जाती है तो विवाह अधिकारी अपनी जांच के बाद यह निर्णय लेता है कि यह शादी हो सकती है या नहीं। 
 धोखाधड़ी होने पर दोषी को पकड़ने में मददगार 
अगर कोई किसी को शादी के बाद धोखा देकर भाग जाता है तो ऐसे में महिला इस प्रमाण पत्र की मदद से पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज करा सकती हैं। आवेदन के साथ संलग्न दस्तावेजों की मदद से पुलिस दोषी का पता आसानी से लगा लेती है। 

 तलाक लेना हो जाता है आसान
तलाक के लिए अपील करने के लिए भी आपको विवाह पंजीकरण का सर्टिफिकेट दिखाना होगा। सिंगल मदर या तलाकशुदा के लिए नौकरी में आरक्षण का लाभ लेने के लिए तलाक का दस्तावेज दिखाना होता है। यहां तक कि गुजाराभत्ता के लिए भी आपको मैरिज सर्टिफिकेट दिखाना होगा। 
  ये दस्तावेज हैं जरूरी 
*दोनों द्वारा हस्ताक्षर किया हुआ आवेदन पत्र। *दोनों की जन्मतिथि का प्रमाण पत्र। 
 *अगर शादी किसी धार्मिक स्थल पर हुई हो तो वहां के पुरोहित या पंडित द्वारा जारी किया गया विवाह प्रमाण पत्र। 
 *अगर आप किसी विदेशी से शादी कर करने जा रही हैं *तो उस व्यक्ति के देश की एम्बेसी से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट हो। *अगर अपना सरनेम बदलना चाहती हैं तो 10 रुपये का नॉन-ज्यूडिशियल स्टैम्प पेपर।
 *10 रुपये का नॉन-ज्यूडिशियल स्टैम्प पेपर पर पति-पत्नी द्वारा अलग-अलग एफिडेविट। 
 * सभी दस्तावेजों को किसी गैजेटेड ऑफिसर से अटेस्ट करवाएं।





Post a Comment

0 Comments